CG Teacher Promotion: 28 हजार शिक्षकों का प्रमोशन अटका! TET बना बड़ी बाधा, विभाग के फैसले से मचा हड़कंप
32 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने दी थी TET परीक्षा, सिर्फ करीब 4,500 हुए पास; 20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षक भी दायरे में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर एक बार फिर बड़ा पेंच फंस गया है। TET पास करने की अनिवार्यता ने करीब 28 हजार शिक्षकों की पदोन्नति पर संकट खड़ा कर दिया है। छह महीने पहले आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रदेश के 32 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने हिस्सा लिया था, लेकिन इनमें से केवल करीब 4,500 शिक्षक ही परीक्षा पास कर सके।
सबसे बड़ी चिंता उन शिक्षकों की है, जो 20 से 25 साल से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन TET में सफल नहीं हो पाए। अब विभागीय स्तर पर यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि TET पास किए बिना प्रमोशन नहीं मिलेगा, हजारों शिक्षकों की पदोन्नति अधर में लटक गई है।
15 अगस्त से बढ़ाकर 30 अगस्त हुई प्रमोशन की तारीख
शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर पहले 15 अगस्त की समय-सीमा तय की गई थी। अब इसे बढ़ाकर 30 अगस्त कर दिया गया है। ऐसे में शिक्षकों की नजरें अब विभाग के अगले फैसले पर टिकी हैं। खासकर उन हजारों शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है, जो वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
10 अगस्त की बैठक के बाद बढ़ी बेचैनी
सोमवार, 10 अगस्त को स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक हुई। बैठक में TET को लेकर लिए गए निर्णय ने शिक्षकों की चिंता और बढ़ा दी।विभागीय स्तर पर यह बात सामने आई कि TET पास किए बिना किसी शिक्षक को प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। इसके बाद शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ आवाज तेज कर दी है। शिक्षकों का तर्क है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की पदोन्नति को एक प्रतियोगी परीक्षा से जोड़ना उचित नहीं है।
32 हजार ने दी परीक्षा, सिर्फ 4,500 पास
TET परीक्षा में प्रदेशभर से 32 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। इनमें ऐसे शिक्षक भी शामिल थे, जो वर्षों से सरकारी स्कूलों में अध्यापन कर रहे हैं। लेकिन परीक्षा परिणाम में करीब 4,500 शिक्षक ही सफल हो सके। यानी बड़ी संख्या में शिक्षक TET की पात्रता हासिल नहीं कर पाए। अब यही शिक्षक प्रमोशन की दौड़ से बाहर होने की स्थिति में हैं।
शिक्षक संगठनों का सरकार पर दबाव बढ़ा
TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी है। संगठन मांग कर रहे हैं कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि उनकी पदोन्नति का रास्ता खुल सके।
वीरेंद्र दुबे बोले- प्रतियोगी परीक्षा की अनिवार्यता गलत
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए TET जैसी प्रतियोगी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता उचित नहीं है।
उनका कहना है कि खासकर 20-25 साल से सेवा दे रहे शिक्षकों को इस व्यवस्था से परेशानी होगी। ऐसे शिक्षकों के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।
संजय तिवारी ने उठाया सवाल- सिर्फ प्राथमिक और मिडिल शिक्षकों पर क्यों?
छग विद्यालय शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय तिवारी ने TET की अनिवार्यता पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल के शिक्षकों के प्रमोशन के लिए TET को अनिवार्य किया है। यदि यह व्यवस्था लागू करनी है तो इसे सभी श्रेणी के शिक्षकों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
संजय शर्मा बोले- प्रमोशन रोकने का प्रयास
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने इसे शिक्षकों की पदोन्नति रोकने का प्रयास बताया है। उनका कहना है कि एकाएक TET की अनिवार्यता लागू करने से बड़ी संख्या में शिक्षक प्रमोशन की पात्रता से बाहर हो जाएंगे। संगठन विभागीय परीक्षा कराने की मांग कर रहा है।
अब बड़ा सवाल: प्रमोशन होगा या TET में फंसेंगे हजारों शिक्षक?
शिक्षकों के प्रमोशन की अंतिम तारीख 30 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग TET की अनिवार्यता में कोई राहत देगा या फिर हजारों शिक्षकों का प्रमोशन अगले चरण तक टल जाएगा? एक तरफ विभाग नियम और पात्रता का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ शिक्षक संगठन लंबे अनुभव को आधार बनाकर विभागीय परीक्षा की मांग कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि 30 अगस्त तक सरकार इस विवाद का कोई रास्ता निकालती है या फिर 28 हजार से ज्यादा शिक्षकों की पदोन्नति TET की बाधा में अटक जाती है।
